संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (UNCTAD) द्वारा जारी “डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट 2024” के अनुसार, तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्रिप्टोकरेंसी जैसी तकनीकें एक ओर जहाँ जीवन सुगम बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल रही हैं।
डिजिटल उपकरणों के उत्पादन से लेकर उनके निपटान तक भारी मात्रा में कच्चे माल और संसाधनों की आवश्यकता होती है:
उपकरण निर्माण में कच्चे माल की खपत:
2 किलोग्राम वजन का कंप्यूटर तैयार करने में 800 किलोग्राम कच्चे माल की आवश्यकता होती है।
1 स्मार्टफोन के उत्पादन से निपटान तक लगभग 70 किलोग्राम कच्चे माल का उपयोग होता है।
इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) में वृद्धि: 2010 से 2022 के बीच स्क्रीन और छोटे आईटी उपकरणों से निकलने वाला ई-कचरा 30% बढ़कर 1.05 करोड़ टन तक पहुंच गया है।
खनिजों पर बढ़ती निर्भरता: 1960 में मोबाइल निर्माण के लिए पीरियोडिक टेबल के 10 तत्वों की आवश्यकता होती थी, जो 2021 तक बढ़कर 63 तत्वों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट) तक पहुंच गई है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, अगले 26 वर्षों में इन खनिजों की मांग में 500% की वृद्धि हो सकती है।
| क्षेत्र / गतिविधि | ऊर्जा एवं जल खपत के आंकड़े | पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभाव |
|---|---|---|
| डिजिटल इकोसिस्टम (कुल) | विश्व की कुल बिजली खपत का 6% से 12% | वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 3.2% का योगदान (जो वायु परिवहन और शिपिंग के बराबर है)। |
| डेटा सेंटर्स (Data Centers) | 2022 में 460 टेरावाट घंटे बिजली खपत | 4.2 करोड़ अमेरिकी घरों की वार्षिक खपत के बराबर। 2026 तक इसके दोगुना होने का अंदेशा है। |
| बिटकॉइन माइनिंग (Bitcoin Mining) | 2023 में 121 टेरावाट घंटे बिजली खपत | फिनलैंड या बेल्जियम जैसे देशों की वार्षिक खपत से भी अधिक। 2015 से 2020 के बीच खपत 34 गुना बढ़ी। |
| जल खपत (गूगल/माइक्रोसॉफ्ट) | गूगल: 2.12 करोड़ m³ (2022)
माइक्रोसॉफ्ट: 64 लाख m³ | डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए अत्यधिक जल उपयोग से स्थानीय समुदायों में तनाव की स्थिति। |
चुनौतियां: विकासशील देश सस्ते कच्चे माल का निर्यात करते हैं और महंगे डिजिटल उपकरणों का आयात करते हैं। इन देशों में ई-कचरे का अनुचित निपटान स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।
अवसर: अफ्रीका महाद्वीप में विश्व के 55% कोबाल्ट और 47.65% मैंगनीज के भंडार मौजूद हैं। इन खनिजों की बढ़ती वैश्विक मांग से ये देश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं, बशर्ते इसका दोहन पर्यावरण-अनुकूल तरीके से हो।
सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy): रीसाइक्लिंग और री-यूज़ को बढ़ावा देना ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद कीमती धातुओं का पुनरुत्पादित उपयोग हो सके।
अक्षय ऊर्जा में निवेश: डेटा सेंटर्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे को नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) पर स्थानांतरित करना।
पर्यावरणीय मानक व नीतियां: डिजिटल क्षेत्र के लिए सख्त वैश्विक और राष्ट्रीय पर्यावरण नियम लागू करना।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग: संसाधनों और प्रौद्योगिकियों की न्यायसंगत और टिकाऊ पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाना।