यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के 'मैटिल्डा सेंटर' के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया और 'नेचर ह्यूमन बिहेवियर' जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय आपदा नहीं है, बल्कि यह इंसानी संबंधों, सामाजिक ताने-बाने और मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है।
चरम मौसमी घटनाएं और पर्यावरणीय बदलाव लोगों के दैनिक सामाजिक संपर्क को सीमित कर रहे हैं:
अत्यधिक गर्मी और वायु प्रदूषण: हीटवेव और खराब वायु गुणवत्ता के कारण पार्कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही कम हो जाती है। स्कूल व कार्यालय बंद होने से रोजमर्रा की सामाजिक मुलाकातें घटती हैं।
सामाजिक अलगाव: चीन और तुवालु के अध्ययन बताते हैं कि लगातार जलवायु दबाव से लोगों में उदासी और सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
समुदायों का विस्थापन: बाढ़, चक्रवात और जंगल की आग जैसी आपदाएं केवल संपत्ति नष्ट नहीं करतीं, बल्कि सामुदायिक मिलन स्थलों को खत्म कर देती हैं। जापान और डोमिनिकन रिपब्लिक में देखा गया कि पुनर्वास के बाद भी लोग तीव्र अकेलेपन का सामना करते हैं।
सूखे का असर: ग्रामीण ऑस्ट्रेलिया में लंबे सूखे ने कृषि आय को प्रभावित करने के साथ-साथ ग्रामीण सामाजिक जीवन को छिन्न-भिन्न कर दिया।
| प्रभावित वर्ग | प्रभाव का स्वरूप |
|---|---|
| हाशिए पर स्थित समुदाय व गरीब | पर्याप्त संसाधनों, मजबूत आवास और सामाजिक सहारे के अभाव में जल्दी टूट जाते हैं। |
| दिव्यांगजन व बुजुर्ग | आपदा के समय त्वरित सहायता और सामाजिक नेटवर्क तक पहुंच में कठिनाई। |
| मजबूत सामाजिक नेटवर्क वाले लोग | आपदाओं का बेहतर सामना करने और मानसिक रूप से तेजी से उबरने में सक्षम। |
अध्ययन स्पष्ट करता है कि मजबूत सामाजिक संबंध केवल भावनात्मक सहारा नहीं, बल्कि आपात स्थिति में जीवनरक्षक सिद्ध होते हैं:
कनाडा (ब्रिटिश कोलंबिया, 2021): 'हीट डोम' आपदा के दौरान 600 से अधिक मौतें हुईं। इनमें वे लोग सबसे अधिक प्रभावित थे जिनका सामाजिक नेटवर्क कमजोर या न के बराबर था।
ऑस्ट्रेलिया ('ब्लैक समर' बुशफायर): आपदा से वही समुदाय जल्दी उबर सके, जहां आपदा से पूर्व ही पड़ोसियों और स्थानीय लोगों के बीच मजबूत सामाजिक रिश्ते कायम थे।
सामाजिक अवसंरचना (Social Infrastructure) पर निवेश: सरकारें केवल कंक्रीट के बुनियादी ढांचे (बांध, पुल) पर ध्यान न दें, बल्कि पार्क, सामुदायिक केंद्र और बेहतर आवास योजनाओं पर निवेश करें जो लोगों को आपस में जोड़ते हैं।
आपदा पूर्व तैयारी: आपदा के दौरान तुरंत नए सामाजिक रिश्ते नहीं बनाए जा सकते; अतः सामुदायिक सहभागिता और पड़ोसी सुरक्षा नेटवर्क को पहले से मजबूत करना आवश्यक है।
समग्र दृष्टिकोण: जलवायु परिवर्तन से निपटने की नीतियों में तकनीकी और भौतिक समाधानों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक एकजुटता (Social Cohesion) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।