'6 लाख से अधिक हितधारकों का राष्ट्रीय मंच: स्वयं सहायता समूहों से उत्पादक उद्यमों तक महिलाओं के आर्थिक नेतृत्व को नई दिशा'
ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ने 'इंस्टीट्यूट फॉर व्हाट वर्क्स टु एडवांस जेंडर इक्वैलिटी' (IWWAGE) के सहयोग से जेंडर संवाद के 7वें संस्करण का सफल आयोजन किया।
"भागीदारी से नेतृत्व की ओर: आजीविका में महिलाओं की स्वायत्तता बढ़ाना" विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संवाद में देशभर से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिला सदस्यों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLM) के अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और जेंडर विशेषज्ञों सहित 6 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
अपने मुख्य संबोधन में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल ने अप्रैल 2021 (1,400 प्रतिभागी) से लेकर वर्तमान संस्करण तक जेंडर संवाद के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया।
10 करोड़ से अधिक महिलाओं का संजाल: उन्होंने कहा कि देश में स्वयं सहायता समूह आंदोलन 10 करोड़ से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ वैश्विक स्तर पर महिला-नेतृत्व वाले विकास की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
3.46 करोड़ लखपति दीदियां: सालाना 1 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित करने वाली 3.46 करोड़ से अधिक 'लखपति दीदियां' ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की आर्थिक आकांक्षाओं को मजबूती प्रदान कर रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026: संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026' के संदर्भ में महिला किसानों की आर्थिक पहचान, खाद्य सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया।
संवाद के दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए उन मॉडलों की सराहना की गई, जिन्होंने महिलाओं को भूमि, संसाधनों और कृषि नेतृत्व से जोड़ा है:
| राज्य | प्रमुख नवाचार / नीतिगत पहल | मुख्य प्रभाव व उद्देश्य |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक | बिना औपचारिक भूमि स्वामित्व वाले दस्तावेजों की महिला किसानों को भी कानूनी मान्यता प्रदान करना। |
| ओडिशा | भुवनेश्वर घोषणा (Bhubaneswar Declaration) | महिलाओं के भूमि अधिकारों और कृषि संस्थानों में उनके उचित प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाना। |
| आंध्र प्रदेश | RySS प्राकृतिक खेती मॉडल | महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती का सफल संचालन। |
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने जेंडर एकीकरण के क्रमिक विकास पर प्रकाश डाला:
जेंडर एकीकरण और एडवाइजरी: संयुक्त सचिव (RL) श्री अमित शुक्ला ने बताया कि दिसंबर 2021 में जारी जेंडर एडवाइजरी, वार्षिक 'नई चेतना' राष्ट्रीय अभियान और 'प्रैक्टिस गाइड' ने जेंडर एकीकरण को संस्थागत रूप दिया है। अब क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF), उत्पादक समूहों और FPO जैसे आर्थिक संस्थानों में महिलाओं की प्रबंधकीय व वित्तीय क्षमताएं बढ़ाई जा रही हैं।
राष्ट्रीय अभियान-II (उद्यमिता): संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा ने 21 अगस्त से 21 नवंबर 2026 तक संचालित उद्यमिता पर राष्ट्रीय अभियान-II को रेखांकित किया। इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म, मूल्य श्रृंखलाओं और बाजार पहुंच के जरिए महिलाओं को सूक्ष्म-उद्यमी बनाना है।
श्रीमती निहारिका भुइयां (सोनितपुर, असम): SHG की एक साधारण सदस्य से शुरुआत कर महिला-नेतृत्व वाले फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) में शीर्ष नेता बनने का सफर तय किया।
श्रीमती कीर्ति ताई देशमुख (अकोला, महाराष्ट्र): एक गृहिणी से सफल उद्यमी बनने की अपनी यात्रा साझा की और दिखाया कि कैसे कौशल प्रशिक्षण व सरकारी योजनाओं तक पहुंच ने उनके आत्मविश्वास को पंख दिए।
विशेषज्ञों (प्रो. नित्या राव, श्रीमती सीमा कुलकर्णी, श्रीमती गरिमा साई सुंदरम) ने भी बिना पारिश्रमिक वाले देखभाल कार्यों (Unpaid Care Work), संसाधनों के स्वामित्व और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। यह संवाद साबित करता है कि जब महिलाओं को अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो वे केवल लाभार्थी नहीं बल्कि आर्थिक प्रगति की अग्रदूत बनती हैं।