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शिक्षा में महाक्रांति: 10 लाख सरकारी स्कूलों का भविष्य संवारने के लिए एक साथ आए ‘शिक्षाग्रह’ और ‘टीच फॉर इंडिया’

कक्षा के ब्लैकबोर्ड से लेकर समुदाय के दिल तक—भारत की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने और हर बच्चे के लिए गुणवत्तापूर्ण भविष्य सुनिश्चित करने की एक ऐतिहासिक पहल।

 

 

भारत की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, सशक्त और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव ला रहे संगठन ‘शिक्षाग्रह’ (Shikshagraha) ने ‘टीच फॉर इंडिया’ (Teach For India) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। Teach For India अब शिक्षाग्रह नेटवर्क में एक प्रमुख 'मोमेंटम पार्टनर' के रूप में शामिल हो गया है।

यह साझेदारी Teach For India के 17 वर्षों के गहन शैक्षणिक अनुभव, युवा नेतृत्व विकास और इसके शक्तिशाली एलुमनी नेटवर्क को शिक्षाग्रह के व्यापक सामुदायिक मंच के साथ जोड़ेगी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के सरकारी स्कूलों में सीखने के परिणामों (Learning Outcomes) को सुधारना और शिक्षकों, युवा नेताओं, अभिभावकों व स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाकर शिक्षा में गुणात्मक सुधार करना है।

जन-आंदोलन का रूप लेता शिक्षा सुधार

शिक्षाग्रह एक जन-आधारित आंदोलन है, जिसका लक्ष्य देश के 10 लाख सरकारी स्कूलों को इस तरह सशक्त बनाना है कि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। संगठन के आंकड़े इस बदलाव की गवाही देते हैं:

व्यापक पहुंच: अब तक 2.1 लाख से अधिक सरकारी स्कूलों में 3.9 लाख से अधिक शिक्षा-नेताओं को जोड़ा जा चुका है।

सूक्ष्म सुधारों की बड़ी क्रांति: 2.1 लाख स्कूलों में 15.6 लाख से अधिक छोटे-छोटे सुधार (Micro-improvements) किए गए हैं, जिनमें से करीब 45,000 सुधार सीधे स्थानीय समुदायों के नेतृत्व में हुए हैं।

नागरिक समाज की एकजुटता: वर्तमान में 16 राज्यों में कार्यरत 40 से अधिक नागरिक समाज संगठन (NGOs) इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और निवेश का संतुलन

यह साझेदारी एक ऐसे समय में हुई है जब देश में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, बुनियादी साक्षरता सुधारने और शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च को बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2022-23 में केंद्र और राज्यों का शिक्षा पर कुल खर्च देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 4.1 प्रतिशत था। इसके विपरीत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) ने सार्वजनिक शिक्षा निवेश को GDP के 6 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे परिदृश्य में, नागरिक समाज और सामाजिक संगठनों की यह साझा पहल सरकारी संसाधनों को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कक्षा से समुदाय तक: दो मॉडलों का अनूठा संगम

इस साझेदारी के तहत Teach For India का कक्षा-केंद्रित और शिक्षक-विकास मॉडल, शिक्षाग्रह के व्यापक सामुदायिक और प्रशासनिक नेटवर्क से जुड़ेगा।

Teach For India, जिसकी शुरुआत 2008 में हुई थी, अपनी दो वर्षीय फेलोशिप के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को संसाधन-हीन स्कूलों में पढ़ाने के लिए भेजता है। वर्तमान में इसके 5,800 से अधिक पूर्व फेलो (Alumni) हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत से अधिक आज भी शिक्षा, नीति-निर्माण और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

आगामी रणनीति और नेतृत्व के विचार

आने वाले एक वर्ष में दोनों संगठन निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करेंगे:

फेलोशिप और लीडरशिप मॉडल: फेलोशिप कार्यक्रमों और नेतृत्व विकास के साझा मॉडल तैयार करना।

छात्र सहभागिता: कक्षाओं में छात्रों की आवाज और भागीदारी को प्राथमिकता देना।

नेटवर्क एकीकरण: सरकारी स्कूलों में पहले से काम कर रहे बदलाव-वाहकों (Change-makers) को परस्पर जोड़ना।

"Teach For India को अपने नेटवर्क में शामिल करके हम शिक्षकों, अभिभावकों, युवा नेताओं और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को और अधिक मजबूत करना चाहते हैं। सामूहिक प्रयासों को बड़े पैमाने पर ले जाकर ही हम हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख स्कूल बना सकते हैं।" — खुशबू अवस्थी, चीफ क्यूरेटर, शिक्षाग्रह

"10 लाख स्कूलों को बदलने की शिक्षाग्रह की सोच भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव ला सकती है। इस साझेदारी से Teach For India के फेलो और एलुमनी को अपने काम को एक व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का अवसर मिलेगा।" — शाहीन मिस्त्री, सीईओ, टीच फॉर इंडिया

यह साझेदारी केवल बुनियादी ढांचे के सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षक-नेतृत्व, छात्र-भागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को नई दिशा देने का संकल्प है। इन दो प्रमुख ताकतों का एक साथ आना भारत की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को एक मजबूत, समृद्ध और सशक्त भविष्य की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

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