राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता रिपोर्ट (19 सितंबर 2026): केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के 243 शहरों में से करीब 87% हिस्सों में सांस लेना सुरक्षित है, लेकिन एनसीआर और उत्तर भारत के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 19 सितंबर 2026 को जारी 243 शहरों के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि देश में वायु प्रदूषण की स्थिति में मिला-जुला असर देखा जा रहा है। एक तरफ जहां सासाराम देश में सबसे साफ हवा वाला शहर बनकर उभरा है, वहीं उत्तर प्रदेश का मोदीनगर लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर 30.5% शहरों में हवा 'बेहतर' (साफ) और 56.8% शहरों में 'संतोषजनक' दर्ज की गई है, जबकि 12.8% शहरों में हवा का स्तर चिंताजनक बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश का मोदीनगर 203 AQI के साथ देश में सबसे प्रदूषित रहा, जो कि 'खराब' (Poor) श्रेणी में आता है। हालांकि, 18 सितंबर (215 AQI) की तुलना में यहां 12 अंकों का मामूली सुधार दर्ज किया गया है।
इसके विपरीत, बिहार का सासाराम मात्र 21 AQI के साथ देश का सबसे साफ हवा वाला शहर दर्ज हुआ। यदि मोदीनगर की तुलना सासाराम से की जाए, तो मोदीनगर की हवा सासाराम के मुकाबले 9.6 गुना अधिक प्रदूषित है।
सुरक्षित सीमा से भारी विचलन: मोदीनगर में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 230 फीसदी अधिक है।
ओजोन का दबदबा: विश्लेषण से सामने आया है कि मोदीनगर की आबोहवा में ओजोन (O3) गैस पूरी तरह हावी है, जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए अत्यंत घातक मानी जाती है।
19 सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 5 शहर अकेले उत्तर प्रदेश से हैं:
| रैंक | शहर | राज्य / यूटी | AQI दर्ज | प्रमुख प्रदूषक (Pollutant) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | मोदीनगर | उत्तर प्रदेश | 203 | ओजोन (O3) |
| 2 | लेह | लद्दाख | 196 | — |
| 3 | बड़ौत | उत्तर प्रदेश | 193 | PM2.5 |
| 4 | खोरा | उत्तर प्रदेश | 189 | PM2.5 |
| 5 | भिवाड़ी | राजस्थान | 162 | PM2.5 |
| 6 | पानीपत | हरियाणा | 157 | PM2.5 |
| 7 | मानेसर | हरियाणा | 155 | PM2.5 |
| 8 | कैथल | हरियाणा | 154 | — |
| 9 | ग्रेटर नोएडा | उत्तर प्रदेश | 141 | PM10 |
| 10 | नोएडा | उत्तर प्रदेश | 141 | PM10 |
राजधानी दिल्ली और उससे सटे फरीदाबाद में पिछले 24 घंटों के भीतर वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई है।
ताजा AQI: दिल्ली में AQI कल के 88 (संतोषजनक) से बढ़कर आज 118 (मध्यम) पर पहुंच गया। पिछले 24 घंटों में 30 अंकों का उछाल दर्ज किया गया।
वर्ष 2026 का रिपोर्ट कार्ड: दिल्ली में इस साल का सबसे साफ दिन 9 जुलाई 2026 को (AQI 48) दर्ज किया गया था। वहीं, साल का सबसे प्रदूषित दिन 18 जनवरी 2026 रहा, जब AQI 440 (गंभीर) के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था।
फरीदाबाद: यहां भी AQI कल के 107 से बढ़कर आज 137 हो गया (30 अंकों की बढ़ोतरी), और हवा 'मध्यम' श्रेणी में बनी हुई है।
एनसीआर के अन्य शहर: गुरुग्राम (120), गाजियाबाद (103), ग्रेटर नोएडा (141) और नोएडा (141) में भी हवा मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।
विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण के कारक भिन्न हैं:
PM2.5 प्रभावित शहर: बड़ौत, खोरा, भिवाड़ी, पानीपत, मानेसर, मंडी गोबिंदगढ़, फरीदाबाद, जींद, गुरुग्राम, यमुना नगर, मुंगेर और चरखी दादरी। (बारीक कण जो फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंचते हैं)।
PM10 प्रभावित शहर: ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बुलंदशहर, खैरथल, अजमेर, गजरौला, विशाखापत्तनम, बागपत, मुजफ्फरनगर, पाली, हनुमानगढ़, अलवर और गाजियाबाद। (धूल कणों की अधिकता)।
सासाराम (21), मुंबई (35), चंडीगढ़ (43), हैदराबाद (48), श्रीनगर, रायपुर, इंदौर, भोपाल, ठाणे, नवी मुंबई, नासिक, तिरुवनंतपुरम, गंगटोक, गांधीनगर, पटियाला, ऋषिकेश, सिलीगुड़ी, नागपुर आदि।
ग्वालियर (57), गुवाहाटी (66), लखनऊ (74), चेन्नई (76), पटना (76), जयपुर (86), कोलकाता, बेंगलुरु, वाराणसी, देहरादून, आगरा, प्रयागराज, पुणे, जालंधर, अमृतसर, कानपुर, मेरठ आदि।
| AQI सीमा | वायु गुणवत्ता की श्रेणी | स्वास्थ्य पर प्रभाव |
|---|---|---|
| 0 – 50 | बेहतर (Good) | न्यूनतम या न के बराबर प्रभाव। |
| 51 – 100 | संतोषजनक (Satisfactory) | संवेदनशील लोगों को सांस लेने में हल्की असुविधा। |
| 101 – 200 | मध्यम (Moderate) | फेफड़े, अस्थामा व हृदय रोगियों को सांस में तकलीफ। |
| 201 – 300 | खराब (Poor) | लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकांश लोगों को परेशानी। |
| 301 – 400 | बेहद खराब (Very Poor) | गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। |
| 401 – 500 | गंभीर (Severe) | स्वस्थ व्यक्तियों पर बुरा असर, मरीजों के लिए जानलेवा। |
19 सितंबर 2026 के आंकड़े दर्शाते हैं कि देश के बड़े हिस्से में हवा सांस लेने योग्य बनी हुई है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर और औद्योगिक पट्टियों में मध्यम से खराब श्रेणी की ओर बढ़ता AQI आने वाले दिनों में और सख्त निगरानी व प्रदूषण नियंत्रण उपायों की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।