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उत्तर प्रदेश के स्कूलों में नई पहल: अब विद्यालय बनेंगे ई-कचरा संग्रहण केंद्र, छात्र सीखेंगे पर्यावरण संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट के गुर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में कौशल विकास और स्वच्छता प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए दो चरणों में चलाया जाएगा विशेष अभियान।

 

 

 

उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता प्रबंधन की दिशा में एक अभिनव और दूरगामी पहल की शुरुआत की है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अब केवल किताबी ज्ञान का केंद्र न रखकर ई-कचरा संग्रहण केंद्र (E-Waste Collection Centers) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे की पहचान, उसके दुष्परिणामों और सुरक्षित निस्तारण (वेस्ट मैनेजमेंट) के प्रति जागरूक बनाना है, जिससे वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू दिशा-निर्देशों को धरातल पर उतारते हुए सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल विकास (Skill Development) से सीधे जोड़ा जा रहा है।

घर का अनुपयोगी ई-कचरा बनेगा सीखने का माध्यम

इस नई व्यवस्था के तहत छात्र अपने घरों में पड़े अनुपयोगी, खराब और बेकार हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अपने अभिभावकों की सहमति से स्कूल में स्थापित संग्रह केंद्र पर जमा कर सकेंगे।

शिक्षक रामनरेश ने बताया कि इस अभियान के जरिए बच्चों को घर पर पड़े ई-कचरे को पहचानने और उसे सुरक्षित तरीके से निपटाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्कूलों में सुरक्षित और सूखे कंटेनरों में ई-कचरा एकत्र किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

खराब व पुराने मोबाइल फोन

चार्जर और केबल

कैलकुलेटर

कंप्यूटर की-बोर्ड और माउस

अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

इस प्रक्रिया से जहां एक ओर घरों से हानिकारक ई-कचरा दूर होगा, वहीं दूसरी ओर यह छात्रों के लिए व्यावहारिक रूप से ई-कचरा प्रबंधन सीखने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

दो चरणों में आयोजित होगा विशेष अभियान

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार, ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता का यह अभियान दो प्रमुख चरणों में संचालित किया जाएगा:

पहला चरण: 30 सितंबर तक।

दूसरा चरण: 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक (स्वच्छता पखवाड़े के रूप में)।

अभियान के दौरान विद्यालयों में स्वच्छता के साथ-साथ इको-फ्रेंडली (पर्यावरण-अनुकूल) वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

चार रंगों के कूड़ेदान: वैज्ञानिक कचरा पृथक्करण की सीख

कचरे के वैज्ञानिक और व्यवस्थित निस्तारण के लिए प्रत्येक स्कूल में चार अलग-अलग रंगों के कूड़ेदान रखे जाएंगे, जिनमें कचरे की प्रकृति के अनुसार ही संग्रहण किया जाएगा:

कूड़ेदान का रंगकचरे की श्रेणीएकत्रित की जाने वाली वस्तुएं
हरा कूड़ेदानगीला कचराबचा हुआ भोजन, सब्जी और फलों के छिलके आदि
नीला कूड़ेदानसूखा कचराकागज, प्लास्टिक, कांच, रबर और लकड़ी
लाल कूड़ेदानस्वच्छता अपशिष्ट (Sanitary Waste)प्रयुक्त डायपर, सैनिटरी पैड और मेडिकल वेस्ट
काला कूड़ेदानविशेष देखभाल अपशिष्ट (Hazardous Waste)पेंट के डिब्बे, एक्सपायर्ड दवाएं, खराब बल्ब, ट्यूबलाइट आदि

1.23 लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

हाथरस जिले के ही 1,236 परिषदीय और 400 माध्यमिक स्कूलों में यह सुविधा शुरू की जा रही है, जिससे जिले के लगभग 1 लाख बच्चों को सीधे ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा। संपूर्ण प्रदेश स्तर पर लागू होने से लाखों छात्र इस कौशल विकास योजना से लाभान्वित होंगे।

शिक्षाविदों, अधिकारियों और अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं

इस अनूठी पहल का समाज के विभिन्न वर्गों ने खुले दिल से स्वागत किया है:

"बच्चों के लिए कौशलात्मक पढ़ाई बहुत जरूरी है। स्वच्छता हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को बचपन से ही इसका पाठ पढ़ाना और कौशल विकास से जोड़ना उनके भविष्य और करियर को नई दिशा देगा।"

— राजेश कुमार, अभिभावक

"आज के समय में बच्चों को व्यावहारिक और कौशल-परक शिक्षा देना बेहद जरूरी है। ई-कचरा प्रबंधन सिखाना एक अत्यंत सराहनीय और समयाुकूल पहल है। इसे प्रदेश के सभी विद्यालयों में पूर्ण रूप से लागू किया जाना चाहिए।"

— सुरेश शर्मा, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

"शासन के निर्देशों के क्रम में स्वच्छता प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्कूलों में शिक्षक बच्चों को कचरा प्रबंधन का पाठ पढ़ा रहे हैं। ई-कचरा प्रबंधन सीखने से छात्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। शासन द्वारा जारी सभी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।"

— गिरिराज सिंह, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, हाथरस

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