राज्य में विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को गति देने, नौकरशाही के झंझटों को खत्म करने और सुगम कारोबार (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार का बड़ा नीतिगत निर्णय।
हरियाणा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की स्थापना और उनके विस्तार को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 'राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026' (Right to Business Act, 2026) को अधिसूचित कर दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र की MSME इकाइयों को समयबद्ध मंजूरियां (Time-bound Clearances) प्रदान करना और उद्योग शुरू करने में आने वाली प्रशासनिक व प्रक्रियात्मक बाधाओं को न्यूनतम करना है।
इस कानून के लागू होने से न केवल नई विनिर्माण इकाइयां (Manufacturing Units) स्थापित करने वाले उद्यमियों को लाभ मिलेगा, बल्कि अपनी मौजूदा इकाइयों का विस्तार (Expansion) करने वाले MSME को भी सीधा फायदा पहुंचेगा।
अधिनियम के तहत शुरुआती मंजूरियों की समय-सीमा तय कर दी गई है:
आशय की घोषणा (Declaration of Intent): पात्र उद्यम को सबसे पहले जिला नोडल एजेंसी (District Nodal Agency) के पास सैद्धांतिक मंजूरी के लिए अपनी आशय की घोषणा जमा करनी होगी।
15 दिन की समय-सीमा: जिला नोडल एजेंसी को आवेदन प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर इस पर अंतिम निर्णय लेना अनिवार्य होगा।
अपील व्यवस्था: यदि निर्धारित 15 दिनों में मंजूरी प्रदान नहीं की जाती है, तो मामला स्वतः 'हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर' (HEPC) के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (Deputy CEO) के पास स्थानांतरित हो जाएगा, जिन्हें अगले 10 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा।
राज्य की औद्योगिक नीति के तहत इसमें स्वचालित डीम्ड क्लियरेंस (Deemed Clearance) की व्यवस्था भी शामिल की गई है।
नए कानून में MSME इकाइयों को स्थापित होने के शुरुआती दौर में राहत देने के लिए 3 साल (36 महीने) का 'मोरेटोरियम पीरियड' तय किया गया है:
सामान्य निरीक्षण पर रोक: इस 36 महीने की अवधि के दौरान उद्यम का कोई सामान्य या रूटीन निरीक्षण (Routine Inspection) नहीं किया जाएगा और न ही किसी दंडात्मक/जबरन कार्रवाई का दबाव रहेगा।
विशेष परिस्थितियों में ही जांच: यदि सुरक्षा, भूमि के दुरुपयोग, अनधिकृत निर्माण या किसी गंभीर विषय पर कोई लिखित शिकायत मिलती है, तो केवल तभी निरीक्षण की अनुमति होगी।
कड़े नियम: शिकायत आधारित निरीक्षण के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी के प्रमुख को लिखित कारण दर्ज करने होंगे। साथ ही, यह जांच संयुक्त निदेशक (Joint Director) या उससे उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा ही की जाएगी।
यद्यपि 3 साल का मोरेटोरियम निरीक्षणों से राहत देता है, परंतु यह उद्यम को आवश्यक वैधानिक मंजूरियों (Statutory Clearances) से छूट प्रदान नहीं करता।
एकल खिड़की प्रणाली: पात्र इकाइयों को संबंधित विभागों से मिलने वाली सभी वैधानिक मंजूरियों के लिए 'हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर' के 'इन्वेस्ट हरियाणा' (Invest Haryana) सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ही आवेदन करना अनिवार्य होगा।
डिजिटल रिकॉर्ड ट्रैकिंग: जिला नोडल एजेंसी द्वारा आशय की घोषणा, जारी की गई सैद्धांतिक मंजूरियों और डीम्ड अप्रूवल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
| मुख्य मापदंड | पुरानी व्यवस्था | राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026 के तहत नई व्यवस्था |
|---|---|---|
| मंजूरी प्रक्रिया | विभिन्न विभागों के चक्कर और अनिश्चित समय | 15 दिनों में सैद्धांतिक मंजूरी या डीम्ड अप्रूवल |
| निरीक्षण (Inspection) | बार-बार सामान्य व रूटीन निरीक्षण का जोखिम | 3 साल तक सामान्य निरीक्षण से पूर्ण राहत (मोरेटोरियम) |
| शिकायत पर कार्रवाई | निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा जांच | केवल उच्चाधिकारियों (संयुक्त निदेशक या ऊपर) द्वारा सह-कारण जांच |
| आवेदन का तरीका | अलग-अलग विभागीय पोर्टल व दस्तावेज | 'इन्वेस्ट हरियाणा' सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए केंद्रीकृत आवेदन |
बड़े उद्योगों की तुलना में छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के पास सीमित वित्तीय और प्रशासनिक संसाधन होते हैं। ऐसे में अनुपालन (Compliance) में होने वाली देरी उनकी उत्पादकता को प्रभावित करती है।
हरियाणा सरकार द्वारा लागू किया गया 'राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026' सुरक्षा और नियामकीय मानकों से समझौता किए बिना MSME क्षेत्र के लिए एक पारदर्शी, जवाबदेह और उद्योग-अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।