गर्मी के कारण प्रसव संबंधी जटिलताओं में इजाफा; 92% स्वास्थ्यकर्मियों ने विशेष प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग की।
नई दिल्ली: बढ़ती वैश्विक गर्मी (ग्लोबल वॉर्मिंग) अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सेहत के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले रही है। पांच देशों में कराए गए एक नए व्यापक सर्वे में 73% से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने खुलासा किया है कि पिछले पांच वर्षों में अत्यधिक गर्मी (हीटवेव) के कारण गर्भावस्था की जटिलताओं और नवजातों में बीमारियों के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए तत्काल कदम उठाने की चेतावनी दी है।
भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, ब्रिटेन और जिम्बाब्वे के 1,000 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच किए गए इस अध्ययन में बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है:
98% स्वास्थ्यकर्मियों ने माना कि उन्होंने अत्यधिक गर्मी से प्रभावित गर्भवती महिलाओं का इलाज किया है।
99% डॉक्टरों ने गर्मी के कारण नवजातों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर नुकसान देखा या संदेह जताया।
76% विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ते तापमान का सीधा असर गर्भस्थ शिशु (भ्रूण) और नवजात के विकास पर पड़ रहा है।
81% स्वास्थ्यकर्मियों का मानना है कि यदि तुरंत ठोस नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो अगले 5 वर्षों में यह संकट कई गुना अधिक भयावह हो जाएगा।
वैज्ञानिक अध्ययनों और समीक्षाओं के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तापमान शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे गंभीर जटिलताएं पैदा होती हैं:
| समस्या / प्रभाव | खतरा / प्रतिशत बढ़ोतरी |
|---|---|
| समय से पहले प्रसव (Pre-term birth) | तापमान में प्रत्येक 1°C वृद्धि पर ~5% बढ़ोतरी |
| प्रसूति संबंधी जटिलताएं (Obstetric complications) | हीटवेव के दौरान 25% अधिक जोखिम |
| नवजातों में विकास/वजन में कमी | 34% डॉक्टरों द्वारा दर्ज मामले |
| डिहाइड्रेशन व सांस की तकलीफ | 36% नवजातों में पाई गई समस्या |
गर्मी का असर केवल सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को भी बाधित कर रहा है:
27% स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार अत्यधिक गर्मी के कारण गर्भवती महिलाएं समय पर अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पा रही हैं।
29% विशेषज्ञों ने हीटवेव के दौरान आपातकालीन (Emergency) मामलों में अचानक वृद्धि दर्ज की है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने मांग की है कि इस जलवायु संकट से निपटने के लिए उन्हें बेहतर संसाधनों और प्रशिक्षण की आवश्यकता है:
92% डॉक्टरों और दाइयों ने अत्यधिक गर्मी के दौरान विशेष देखभाल के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण और उपकरणों की मांग की।
55% विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस जारी करने पर जोर दिया।
"अत्यधिक गर्मी का प्रभाव अब एक अनदेखा सच नहीं रहा। हमें अस्पतालों को ठंडा रखने, चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने और समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी।" — शोध रिपोर्ट का निष्कर्ष
जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका में चल रहे HAPI (Heat and Pregnancy Initiative) अध्ययन के तहत कई व्यावहारिक और कम लागत वाले उपायों का परीक्षण किया जा रहा है:
कूल रूफ टेक्नोलॉजी: स्वास्थ्य केंद्रों की छतों पर गर्मी परावर्तित (Solar reflective) पेंट लगाना।
स्थानीय जलवायु चेतावनी: समय पर हीटवेव अलर्ट जारी करना।
पोर्टेबल उपकरण: हाथ से चलने वाले पंखे और ओआरएस/डिहाइड्रेशन किट की सुलभता।
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