1966 की आईएलओ-यूनेस्को सिफारिश के 60 वर्ष पूरे; 'स्टैंडिंग विद टीचर्स' थीम के साथ मनाया गया ऐतिहासिक अवसर
नई दिल्ली। हर साल 5 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व शिक्षक दिवस (World Teachers' Day) मनाया जाता है। वर्ष 2026 का यह अवसर इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह वर्ष 1966 की ऐतिहासिक आईएलओ-यूनेस्को (ILO-UNESCO) की शिक्षकों की स्थिति से संबंधित सिफारिश के 60 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की वैश्विक थीम “Standing with teachers: 60 years of protecting the profession, advancing its status and shaping our futures” रखी गई है। यह अवसर शिक्षकों के सम्मान के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के दौर में शिक्षक की महत्ता को रेखांकित करने का माध्यम बना।
वर्ष 1966 की यूनेस्को सिफारिश ने पहली बार इस विचार को विश्व पटल पर स्थापित किया कि शिक्षा की गुणवत्ता सीधे तौर पर शिक्षक की योग्यता, तैयारी, कार्य स्थितियों और सामाजिक सम्मान से जुड़ी है। बाद में वर्ष 1997 में उच्च शिक्षा में शिक्षण कर्मियों की स्थिति पर अलग सिफारिश अपनाकर इस ढांचे को और व्यापक बनाया गया, जिससे शिक्षक के अधिकारों और उत्तरदायित्वों को वैश्विक शिक्षा प्रणाली के केंद्र में रखा जा सका।
भारतीय सभ्यता में गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जीवन-दृष्टि का मार्गदर्शक रहा है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 में भी गुरु-शिष्य परंपरा को सीखने की बुनियादी अवधारणा माना गया है। इसमें शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद, विचार-विमर्श और ज्ञान एवं विवेक की प्राप्ति को विशेष महत्व दिया गया है।
डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार ने शिक्षक की भूमिका को कम नहीं किया, बल्कि और चुनौतीपूर्ण व महत्वपूर्ण बना दिया है:
सूचना बनाम विवेक: इंटरनेट के दौर में विद्यार्थियों के पास सूचनाओं की प्रचुरता है, लेकिन सही और गलत सूचना में अंतर पहचानना और उसका नैतिक इस्तेमाल सिखाना शिक्षक का काम है।
मानवीय संवेदनाएं: तकनीक तथ्य प्रदान कर सकती है, परंतु विद्यार्थी को संदर्भ, नैतिकता, आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने की जिम्मेदारी शिक्षक की है।
शिक्षक दिवस केवल उत्सव तक सीमित न रहकर गंभीर चिंतन का भी समय है:
प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी: यूनेस्को (UNESCO) और इंटरनेशनल टास्क फोर्स ऑन टीचर्स फॉर एजुकेशन 2030 के आकलन के अनुसार, 2030 तक सार्वभौमिक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लक्ष्य को पाने के लिए दुनिया को लगभग 4.4 करोड़ अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता होगी।
बढ़ता कार्यभार और प्रशिक्षण: शिक्षकों पर बढ़ता गैर-शैक्षणिक कार्यभार, संसाधनों का अभाव और बदलते डिजिटल पाठ्यक्रम के अनुसार लगातार अपडेट रहने की चुनौती प्रमुख मुद्दे हैं।
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