कोवलम-नेमेली खारे आर्द्रभूमि को पेयजल जलाशय में बदलने का स्थानीय मछुआरों, आदिवासियों और पर्यावरणविदों द्वारा भारी विरोध
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित कोवलम-नेमेली खारे आर्द्रभूमि (Estuarine Wetland) क्षेत्र में बनाई जा रही 'मामल्लन जलाशय परियोजना' को लेकर विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार चेन्नई शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए इस खारे तटीय क्षेत्र को मीठे पानी के छठे जलाशय में बदलने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि, स्थानीय मछुआरा समुदायों, पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने इस परियोजना से होने वाले गंभीर पारिस्थितिक और सामाजिक नुकसान को लेकर गहरा विरोध दर्ज कराया है।
तटबंध निर्माण: यह कोई कंक्रीट का बांध नहीं, बल्कि मिट्टी का एक विशाल तटबंध (Earther Bund) है जो आर्द्रभूमि की परिधि पर लगभग 30 किलोमीटर (8,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र) में फैला हुआ है।
चरणबद्ध निर्माण: परियोजना का पहला चरण 4,375 एकड़ क्षेत्र में जारी है, जबकि शेष आर्द्रभूमि के लिए दूसरा चरण प्रस्तावित है।
7,000 मछुआरा परिवारों पर संकट: आर्द्रभूमि के आसपास स्थित 16 गांवों के लगभग 7,000 मछुआरा परिवारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर इस खारे पानी के तंत्र पर निर्भर है।
इरुलर जनजाति की पारंपरिक प्रथा का अंत: विशेष रूप से इरुलर आदिवासी समुदाय की महिलाएं हाथ और पैरों के उपयोग से मछली व झींगा पकड़ती हैं। इस सदियों पुरानी पारंपरिक प्रथा को स्थानीय भाषा में ‘‘इरल थाझुवुथल’’ कहा जाता है। इसमें किसी मशीन का प्रयोग नहीं होता।
आय में भारी गिरावट: मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर के बीच मछली पकड़ने के मुख्य सीजन में एक परिवार 1 से 3 लाख रुपये तक कमा लेता था, जिससे उनका पूरे साल का गुजारा चलता था। जलाशय के निर्माण के कारण अब मछुआरों की आय घटकर आधी रह गई है।
समुद्री मत्स्य पालन पर दबाव: आर्द्रभूमि तक पहुंच सीमित होने के कारण मछुआरे समुद्र की ओर पलायन कर रहे हैं। इससे समुद्र में सीमित मछलियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिससे प्रति मछुआरा प्राप्त होने वाली उपज में गिरावट आई है।
लवणता का असंतुलन: बंगाल की खाड़ी से जुड़े इस आर्द्रभूमि में समुद्र से संपर्क कटने और मीठे पानी के भराव से लवणता (Salinity) का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाएगा, जिससे झींगा, केकड़ा और खारे पानी की मछलियों के प्रजनन क्षेत्र नष्ट हो जाएंगे।
232 जीव प्रजातियों पर संकट: आर्द्रभूमि तंत्र के नष्ट होने से इस क्षेत्र में पाई जाने वाली लगभग 232 जीवजंतुओं की प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
45,000 प्रवासी पक्षी प्रभावित: यह क्षेत्र 'सेंट्रल एशियन फ्लाईवे' पर स्थित है। जलाशय बनने से मध्य एशिया से आने वाले लगभग 45,000 प्रवासी पक्षी (जिनमें 16,000 प्रवासी बतख शामिल हैं) प्रभावित होंगे।
"सरकार चेन्नई के लोगों की प्यास बुझाने के लिए हमारे 16 गांवों के लगभग 7,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका छीनने पर उतारू है। यदि इस इलाके को जलाशय में बदला गया तो पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र ही बदल जाएगा।" — पी. प्रभाकरण, अध्यक्ष, भारत मक्कल कषगम
"खारे पानी की आर्द्रभूमि बहुत विशिष्ट वातावरण होती है। जब आप समुद्र से उनका संपर्क काटकर उन्हें मीठे पानी से भर देते हैं, तो लवणता का संतुलन बिगड़ने से उसमें रहने वाले जीव मर जाते हैं।" — जे. राजवरम, राज्य सचिव, भारत मक्कल कषगम
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