रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा समुद्री तापमान, सूखे और भारी बारिश की चेतावनी के बीच दुनिया को रहना होगा सतर्क।
दुनिया के मौसम पर असर डालने वाला अल नीनो इस साल तेजी से मजबूत हो रहा है। विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का समुद्री तापमान अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अल नीनो दिसंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह पिछले कई दशकों में सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है, जिसका असर तापमान, बारिश और सूखे पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
वैज्ञानिक प्रशांत महासागर के 'नीनो 3.4' क्षेत्र की सतह के तापमान पर लगातार नजर रखते हैं:
जून 2026 में इस क्षेत्र का तापमान सामान्य से करीब 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
अगस्त तक यह अंतर बढ़कर लगभग 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया।
अक्टूबर से दिसंबर के दौरान इसके औसतन करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।
विश्व मौसम संगठन के अनुसार, यह शक्तिशाली अल नीनो फरवरी 2027 तक सक्रिय रह सकता है।
अल नीनो के मजबूत होने का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक तापमान पर पड़ेगा। इस दौरान दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहने और गर्मी की चरम घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी। अगस्त 2026 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान पहले ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है।
इसके अलावा, यह दुनिया के कई हिस्सों में बारिश के पैटर्न को भी बदल देगा:
ज्यादा बारिश: पूर्वी और मध्य प्रशांत क्षेत्र, अफ्रीका के ग्रेटर हॉर्न क्षेत्र, मध्य एशिया, पूर्वी एशिया के तटीय क्षेत्रों और उत्तरी अरब प्रायद्वीप में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
कम बारिश: पश्चिमी प्रशांत, भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, कैरेबियन और उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में सामान्य से कम बारिश की संभावना है।
भारत के लिए यह पूर्वानुमान विशेष महत्व रखता है, क्योंकि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश का संकेत दिया गया है। इससे खेती, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियां वास्तविक मौसम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके साथ ही, हिंद महासागर का पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) और अटलांटिक महासागर का उच्च तापमान इस स्थिति को और अधिक जटिल बना रहे हैं।
मजबूत अल नीनो के कारण कृषि, ऊर्जा और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले जोखिमों को देखते हुए दुनिया भर के देशों को आपदा प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए समय रहते पुख्ता तैयारी करने की जरूरत है।
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