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भविष्य की राह और तकनीक: 'विश्व युवा कौशल दिवस' पर विशेष रिपोर्ट

"बदलती दुनिया में युवाओं को सशक्त बनाने का संकल्प; तकनीक, एआई और कौशल विकास के जरिए बेरोजगारी और असमानता को मात देने की तैयारी।"

 

हर साल 'विश्व युवा कौशल दिवस' (World Youth Skills Day) के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 नवंबर 2014 को श्रीलंका द्वारा प्रस्तुत और कई देशों द्वारा समर्थित प्रस्ताव के माध्यम से इस दिन की घोषणा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को उन आवश्यक कौशलों से लैस करना है, जिनकी उन्हें लगातार बदलती और तकनीकी रूप से उन्नत होती दुनिया में आगे बढ़ने के लिए जरूरत है।

युवाओं की क्षमता और वर्तमान चुनौतियाँ

आज के समय में युवा बेरोजगारी और अल्प-रोजगार पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं, खासकर विकासशील देशों में जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण तक पहुंच आज भी सीमित है।

आंकड़ों की जुबानी संकट: संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, पर्याप्त कौशल की कमी के कारण दुनिया भर में लगभग 45 करोड़ युवा (10 में से 7) आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं।

एआई और कार्यस्थल की तैयारी: करीब 86 फीसदी छात्र यह महसूस करते हैं कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस आधुनिक कार्यस्थल के लिए खुद को पर्याप्त रूप से तैयार नहीं पाते हैं।

लैंगिक और डिजिटल अंतर: कम आय वाले देशों में लगभग 90 फीसदी किशोरियों और युवतियों के पास इंटरनेट तथा डिजिटल उपकरणों की सुविधा नहीं है, जिससे वे पिछड़ रही हैं। इसके अलावा, 2022 में 40% से अधिक युवा न तो रोजगार में थे और न ही किसी प्रकार की शिक्षा या प्रशिक्षण (NEET) का हिस्सा थे।

साल 2025 की थीम: 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कौशल'

इस वर्ष की थीम 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कौशल के माध्यम से युवा सशक्तिकरण' (Youth Empowerment through AI and Digital Skills) है, जो अगली पीढ़ी को तकनीक और नवाचार आधारित भविष्य के लिए तैयार करने पर जोर देती है।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) का मानना है कि एआई तकनीक व्यावसायिक प्रशिक्षण के स्वरूप को तेजी से बदल रही है। बुद्धिमान शिक्षण प्रणालियों (Intelligent Learning Systems) और आभासी वास्तविकता (VR) के उपयोग से प्रशिक्षण को अधिक गहन और प्रभावी बनाया जा रहा है। हालांकि, इन बदलावों के साथ डिजिटल विभाजन (Digital Divide) बढ़ने का खतरा भी है, जिससे हाशिए पर रहने वाले युवाओं को विशेष रूप से बचाने की आवश्यकता है।

भारत जैसे देशों के लिए अवसर

भारत जैसे देशों में, जहां 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है, युवा वर्ग आर्थिक और सामाजिक प्रगति की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति है। सही समय पर सही डिजिटल और व्यावसायिक कौशल प्रदान करके इस जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

 

 

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