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नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी का सफर: महत्वाकांक्षी योजना से खामोशी तक की कहानी

"चार साल पहले जिस 'नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी' के बड़े सपने देखे गए थे, वह बिना शोर शराबे के आखिर क्यों बंद हो गई?"

 

 

दुनिया की बेहतरीन डिजिटल शिक्षा तक आम लोगों की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने चार साल पहले 'नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी' बनाने की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया था। हालांकि, अब यह जानकारी सामने आई है कि शिक्षा मंत्रालय ने इस योजना को चुपचाप बंद कर दिया है। ऐसा तब हुआ जब एक अन्य केंद्रीय मंत्रालय ने अलग उद्देश्यों के साथ एक नया डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म शुरू कर दिया।

शुरुआत और उम्मीदें: कोविड-19 काल में हुआ था ऐलान

कोविड-19 महामारी के दौर के बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2022-23 के बजट भाषण में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि यह नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी क्षेत्रीय भाषाओं में लोगों की जरूरत के मुताबिक पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराएगी। बुनियादी ढांचे और ट्रेनिंग को मजबूत करने के लिए इसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करना था।

इसके तुरंत बाद, शिक्षा मंत्रालय ने 2022 में इसकी व्यापक योजना तैयार की। इसका मूल उद्देश्य एक ऐसा राष्ट्रीय उच्च शिक्षा प्लेटफॉर्म तैयार करना था, जहां सरकारी विश्वविद्यालयों के विभिन्न कोर्स और डिग्रियां एक ही छत के नीचे मिल सकें। मंत्रालय ने इसके लिए “हब एंड स्पोक” मॉडल की परिकल्पना की थी, जिसमें आईआईटी मद्रास, दिल्ली यूनिवर्सिटी, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मिलकर सूचना और संचार तकनीक (ICT) की विशेषज्ञता तैयार करते। हालांकि, तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी।

क्यों और कैसे बदली तस्वीर? (NIELIT का प्रवेश)

तीन साल बाद, वर्ष 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अपने एक स्वायत्त संस्थान—नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (NIELIT) के माध्यम से एक अलग डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत की।

जब यह सवाल उठाया गया कि नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी के मूल प्रस्ताव का क्या हुआ, तो एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों के साथ-साथ जब 2025 में NIELIT का प्लेटफॉर्म शुरू हुआ, तो पुराने प्रोजेक्ट को रोकने का फैसला ले लिया गया। अधिकारियों का यह भी मानना था कि अधिकांश उच्च शिक्षा संस्थानों ने पहले ही अपनी ऑनलाइन शिक्षा सुविधाओं का पर्याप्त विस्तार कर लिया है।

दोनों योजनाओं में क्या था बड़ा अंतर?

शिक्षा मंत्रालय की मूल योजना एक व्यापक अकादमिक नेटवर्क तैयार करने की थी, वहीं MeitY के तहत आया NIELIT का डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म पूरी तरह से रोजगार और इंडस्ट्री की जरूरतों पर केंद्रित है।

फोकस: यह प्लेटफॉर्म कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंडस्ट्री 4.0 और सेमीकंडक्टर जैसी उभरती हुई डिजिटल तकनीकों पर आधारित ऑनलाइन और हाइब्रिड (ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन) कौशल कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करता है।

बजट पर असर: इस प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में जाने का असर बजट आवंटन पर भी साफ दिखा। वर्ष 2024-25 में इसके लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे संशोधित कर 25 करोड़ कर दिया गया, और अंततः वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इसके लिए कोई राशि नहीं दी गई।

भले ही मूल 'नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी' का यह प्रोजेक्ट धरातل पर नहीं उतर पाया, लेकिन तकनीकी शिक्षा और डिजिटल लर्निंग के मोर्चे पर नए प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्रयास लगातार जारी हैं।

 

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