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सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल: विज्ञान और कौशल का राष्ट्रीय संगम

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्किल इंडिया’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में CSIR की एक महत्वपूर्ण पहल; अनुसंधान और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को कम करने पर जोर।

 

 

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा संचालित ‘सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल’ एक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुसंधान को कौशल विकास से जोड़कर एक कुशल, आत्मनिर्भर और सशक्त कार्यबल का निर्माण करना है।

यह पहल छात्रों, युवा शोधकर्ताओं, आईटीआई धारकों से लेकर ग्रामीण समुदायों और किसानों तक सभी वर्गों को समावेशी प्रशिक्षण अवसर प्रदान करती है।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं और क्षेत्रीय दायरा

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (NSDM) द्वारा चिन्हित 36 प्रमुख क्षेत्रों में से 18 महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करता है, जिनमें प्रमुख हैं:

प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग: एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी एवं आईटीईएस, पूंजीगत वस्तुएं।

संसाधन एवं उद्योग: रसायन और पेट्रोकेमिकल्स, हाइड्रोकार्बन, लोहा और इस्पात, खनन, रबर, चमड़ा।

कृषि एवं जीवन विज्ञान: कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जीवन विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा, हरित रोजगार।

परंपरा और प्रबंधन: वस्त्र, हस्तशिल्प और कालीन, प्रबंधन और उद्यमिता।

चरणबद्ध प्रगति और अब तक की उपलब्धियां

CSIR की 37 प्रयोगशालाओं के विशाल नेटवर्क के माध्यम से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम ने अब तक उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए हैं:

कार्यक्रम के चरणआयोजित प्रशिक्षणकुल प्रशिक्षित लाभार्थी
चरण I एवं II5,200 से अधिक1.90 लाख से अधिक (ग्रामीण नागरिक व महिलाएं शामिल)
चरण III (जून 2025 से शुरू)425 से अधिक14,000 से अधिक (पहले ही वर्ष में)

नोट: चरण III का शुभारंभ जून 2025 में CSIR की महानिदेशक और DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी द्वारा किया गया था।

कार्यान्वयन और निगरानी संस्थान

इस पूरी पहल के प्रभावी संचालन, समन्वय और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (HRDC), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के पास है, जो इस योजना के नोडल कार्यालय के रूप में कार्य कर रहा है।

अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्रमाणन पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रयोगशाला अनुभव के माध्यम से यह पहल शिक्षार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उद्योग-उपयोगी व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान कर रही है।

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