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सांसों पर संकट: तीन गुना बढ़ीं जंगल की भयंकर आग की घटनाएं, हर साल ले रही हैं 1 लाख से अधिक जानें

WMO की नई रिपोर्ट का खुलासा: जलवायु परिवर्तन और जहरीली हवा के खतरनाक चक्र से बढ़ा वैश्विक स्वास्थ्य और वायु गुणवत्ता पर गंभीर खतरा।

 

7 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज’ के अवसर पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन के बीच के गहरे और खतरनाक संबंधों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और जहरीली हवा अब दो अलग-अलग समस्याएं नहीं हैं, बल्कि यह एक दुष्चक्र का रूप ले चुके हैं जहाँ बढ़ती गर्मी हवा में प्रदूषण को और अधिक विषैला बना रही है।

तीन गुना बढ़ीं दावानल की घटनाएं

1990 के दशक से लेकर अब तक दुनिया भर में भारी धुएं वाली जंगल की आग (Wildfires) की घटनाओं में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। जंगलों से उठने वाला यह धुआं अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रहा, बल्कि दूर-दराज के इलाकों तक पहुँचकर लाखों लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।

प्रमुख बिंदुआंकड़े एवं प्रभाव
वार्षिक मौतें (2010-2018)जंगल की आग से उठने वाले धुएं के कारण हर साल औसतन 1,00,000 अतिरिक्त मौतें होती हैं।
कार्बनिक प्रदूषकदावानल से प्रतिवर्ष 14.3 करोड़ टन जहरीले कार्बनिक प्रदूषक हवा में घुल रहे हैं।
आकलन अंतरपारंपारिक मॉडल आग के धुएं से होने वाले जोखिम और मौतों के आंकड़े को 93% तक कम आंक सकते हैं।

PM2.5 का बढ़ता वैश्विक स्तर और क्षेत्रीय भिन्नता

PM2.5 (2.5 माइक्रोमीटर से कम आकार के सूक्ष्म कण) फेफड़ों की गहराई और रक्तप्रवाह में सीधे प्रवेश कर सांस व हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बनते हैं। WMO के ग्लोबल एटमॉस्फियर वॉच नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार:

प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट: 2025 में उत्तरी कनाडा, रूस के कुछ हिस्सों, पश्चिम-मध्य अफ्रीका और स्पेन में भीषण दावानल के कारण PM2.5 का स्तर औसत से काफी अधिक रहा।

भारत की स्थिति: भारत में बायोमास (जैव ईंधन) जलाने और अन्य उत्सर्जन स्रोतों के कारण PM2.5 का स्तर लंबे समय के औसत से अधिक बना हुआ है।

चीन का उदाहरण: मानवीय गतिविधियों और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण के कारण चीन में PM2.5 के स्तर में गिरावट देखी गई है।

लू और धरातलीय ओजोन का नया खतरा

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ती गर्मी और लू केवल तापमान नहीं बढ़ातीं, बल्कि हवा की रासायनिक संरचना को भी बदल देती हैं। जमीन के पास बनने वाली ओजोन (Ground-level Ozone) मानव स्वास्थ्य, कृषि पैदावार और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद घातक साबित हो रही है।

WMO ने स्पष्ट किया है कि यदि जंगल की आग और जलवायु परिवर्तन के इस दुष्चक्र को रोकने के लिए समन्वित वैश्विक नीतियां नहीं अपनाई गईं, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा।

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