आंध्र प्रदेश में सफल परीक्षण के बाद अब राज्य के 75% परिवारों तक पहुंचेगी तकनीक, समय और लागत की होगी भारी बचत।
सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और जरूरतमंद लोगों तक समय पर पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है। अक्सर लंबी कागजी प्रक्रियाओं और सर्वे के चक्कर में गरीबों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर ने एक अभूतपूर्व एआई-आधारित ‘फैमिली स्कोर’ सिस्टम विकसित किया है, जो बिना नया सर्वे कराए केवल पहले से मौजूद सरकारी आंकड़ों के आधार पर परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन कर सकता है।
यह तकनीक लगभग 15 अलग-अलग सरकारी डेटासेट से मिलने वाली जानकारियों का उपयोग करती है। इसके आधार पर मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किए गए हैं, जिन्हें राज्यव्यापी सर्वेक्षणों से मिले डेटा के जरिए प्रशिक्षित किया गया है।
गत्यात्मक स्कोर: इसके माध्यम से हर परिवार के लिए एक डायनेमिक फैमिली स्कोर तैयार किया जाता है, जिससे सरकार को बार-बार घर-घर जाकर सर्वे करने की जरूरत नहीं पड़ती।
पारदर्शिता और कारण: आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर नितिन सक्सेना के अनुसार, यह सिस्टम केवल स्कोर नहीं देता, बल्कि उसकी वजह भी स्पष्ट करता है ताकि अधिकारी यह समझ सकें कि किसी परिवार को विशेष स्कोर क्यों मिला है।
अंतिम निर्णय इंसानों के हाथ: एआई केवल विश्लेषणात्मक डेटा और सुझाव उपलब्ध कराता है, जबकि कल्याणकारी सहायता देने का अंतिम निर्णय सरकारी अधिकारियों के पास ही रहता है।
आंध्र प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किए गए इस प्रोजेक्ट के पहले चरण के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं। इसे आईआईटी कानपुर के वाधवानी सेंटर फॉर डेवलपिंग इंटेलिजेंट सिस्टम्स और एयरावत रिसर्च फाउंडेशन ने मिलकर तैयार किया है।
75% परिवारों तक पहुंच: परियोजना के दूसरे चरण में इसे पूरे राज्य में विस्तारित किया जाएगा, जिससे आंध्र प्रदेश के करीब 1.72 करोड़ परिवारों में से 1.35 करोड़ परिवारों (लगभग 75%) के लिए फैमिली स्कोर तैयार होने की उम्मीद है।
कम लागत और समय की बचत: मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस तकनीक की सराहना करते हुए कहा है कि इससे महंगे और समय लेने वाले पारंपरिक सर्वे पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
इस पहल के साथ ही आईआईटी कानपुर ने AirawatOS भी पेश किया है। यह शहरी क्षेत्रों के लिए एक डेटा प्लेटफॉर्म है, जो उपग्रहों, सेंसर, सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी रिपोर्टों को जोड़कर शहर की वास्तविक स्थिति का चित्र प्रस्तुत करता है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल का कहना है कि इस पहल का मूल उद्देश्य एआई और उपलब्ध सरकारी डेटा का उपयोग करके नागरिकों की सेवा करना और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक लक्षित तथा संवेदनशील बनाना है। यदि यह मॉडल देश भर में लागू होता है, तो जरूरतमंद परिवारों को उनके हक की मदद के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।