फाइलों से बाहर निकलकर सीधे गरीबों, किसानों और ग्रामीणों का जीवन बदलेगी व्यवस्था; शिकायत निवारण और डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों मंत्रालय “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की गति से काम कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रशासनिक कामकाज का मुख्य उद्देश्य कागजी प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर सीधे किसानों, गरीबों और ग्रामीणों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने शिकायत निवारण को सर्वोच्च प्रशासनिक प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर शिकायतों का निपटारा (Disposal) दिखाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लाभार्थी को धरातल पर वास्तविक समाधान मिलना आवश्यक है:
विशेष समीक्षा टीम: कृषि और ग्रामीण विकास विभागों में 10-10 अधिकारियों की समर्पित टीम गठित की जाएगी, जो प्रतिदिन प्राप्त होने वाली शिकायतों, जनप्रतिनिधियों के पत्रों और विभिन्न पोर्टलों पर दर्ज समस्याओं की निगरानी करेगी।
मासिक समीक्षा: शिकायत निवारण प्रणाली के प्रभाव और कार्यकुशलता की हर महीने उच्च स्तर पर समीक्षा की जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक सुधारों के लिए निम्नलिखित रणनीतिक कदम उठाने के निर्देश दिए:
| सुधार का क्षेत्र | मुख्य पहल एवं निर्देश |
|---|---|
| प्रक्रिया का सरलीकरण | जटिल नियमों, पुराने कायदों और अनावश्यक लाइसेंस व्यवस्था की पहचान कर एक सप्ताह के भीतर सुधार योग्य बिंदुओं की सूची तैयार करना। |
| डिजिटल गवर्नेंस एवं AI | कृषि और ग्रामीण विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा शेयरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना। |
| प्रशासनिक कार्यसंस्कृति | फाइलों की नोटिंग-ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारना, निर्णय प्रक्रिया को तेज करना और लंबित कोर्ट केसों की मजबूती से पैरवी करना। |
| प्रभावी जनसंचार | योजनाओं और सुधारों की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया, वीडियो, ग्राफिक्स और रील्स जैसे आधुनिक माध्यमों का उपयोग। |
विकसित भारत 2047 के वैश्विक विजन को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को समयबद्ध कार्ययोजनाएं और विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने को कहा गया है। राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस और योजनावार भागीदारी को इस सफलता की मुख्य कुंजी माना गया है।
साथ ही, अधिकारियों को अनावश्यक विदेश यात्राओं से परहेज करने और अपनी ऊर्जा व संसाधनों को देश के भीतर योजनाओं के क्रियान्वयन और गुणवत्ता में सुधार लगाने का सख्त निर्देश दिया गया है, ताकि हर योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।