50 हजार सामुदायिक कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और 50 लाख स्वयं सहायता समूह सदस्यों को उद्यम विकास से जोड़कर ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने की तैयारी।
भारत के ग्रामीण परिदृश्य में महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान (National Entrepreneurship Campaign) का आगाज़ किया गया है। 'दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (DAY-NRLM) के तहत शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें संवहनीय और विविधतापूर्ण आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।
अभियान का मूल उद्देश्य और कार्ययोजना
राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का लक्ष्य जमीनी स्तर पर एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
50,000 सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियों (CRPs) का प्रशिक्षण: इस अभियान के तहत 50 हजार CRPs को 'उद्यम प्रोत्साहन' और क्षमता वर्धन (Capacity Building) का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये कार्यकर्ता गांवों में उत्प्रेरक (Catalysts) के रूप में कार्य करेंगे, जो नए उद्यमों की पहचान, स्टार्टअप सहायता, मार्गदर्शन और सतत सहयोग प्रदान करेंगे।
50 लाख SHG सदस्यों का क्षमता निर्माण: DAY-NRLM से जुड़ी 50 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्यों को प्रत्यक्ष रूप से उद्यमिता विकास प्रशिक्षण (Entrepreneurship Development Training) दिया जाएगा।
'हर घर उद्यम, हर गांव समृद्ध' और 'लखपति दीदी' का संकल्प
"हर घर उद्यम, हर गांव समृद्ध"
इस प्रेरक नारे के साथ शुरू हुआ यह अभियान ग्रामीण विकास मंत्रालय के 3 करोड़ 'लखपति दीदियां' बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। 'लखपति दीदी' से तात्पर्य उन SHG महिला सदस्यों से है, जिनकी वार्षिक आय कम से कम ₹1 लाख या उससे अधिक हो। इस विशाल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण स्तर पर स्वयं सहायता समूहों का बड़े पैमाने पर उन्नयन (Scale-up) और गैर-कृषि क्षेत्र के उद्यमों को बढ़ावा देना अनिवार्य है।
12 जनवरी 2026 को आधिकारिक शुभारंभ और हितधारकों की भागीदारी
ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव द्वारा 12 जनवरी 2026 को इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश के प्रमुख नीतिगत और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख शामिल हैं:
नीति आयोग (विकास एवं जनसंपर्क सलाहकार)
नाबार्ड (NABARD के अध्यक्ष)
बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (BMGF)
IFMR LEAD (KREA यूनिवर्सिटी)
भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII)
IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क
विभिन्न राज्यों के 'राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' (SRLM) के वरिष्ठ निदेशक व CEOs।
भविष्य के सकारात्मक परिणाम और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में 'स्टार्टअप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम' (SVEP) जैसी गैर-कृषि आजीविका योजनाओं ने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं सफल बिजनेस मॉडल खड़े कर सकती हैं। इस नए अभियान से भविष्य में निम्नलिखित दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे:
समावेशी और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था: गैर-कृषि क्षेत्रों में नए उद्यमों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और गांवों से पलायन रुकेगा।
औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़ाव: इस अभियान के माध्यम से लाखों ग्रामीण उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय संस्थानों से जोड़कर उद्यम ऋण (Enterprise Loans) प्राप्त करने की राह आसान होगी।
स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति: हजारों प्रशिक्षित CRPs और लाखों प्रेरित महिला उद्यमी मिलकर एक सुदृढ़, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ग्रामीण आर्थिक ढांचा तैयार करेंगी।
राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करेगा, बल्कि भारत को 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।