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संकट में जलनिधि: 11.7 करोड़ झीलों का अस्तित्व खतरे में, 85% जलीय प्रजातियों पर मंडराया विलोपन का साया

27 अगस्त 2026 को आयोजित हो रहे 'विश्व झील दिवस' के दूसरे संस्करण पर एक विशेष रिपोर्ट—जानिए क्यों प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा ही मानव सभ्यता के सुनहरे कल की कुंजी है।

 

 

धरती के कुल भू-भाग के लगभग चार प्रतिशत हिस्से को आच्छादित करने वाली झीलें केवल प्रकृति के मनोरम दृश्य नहीं, बल्कि हमारी संपूर्ण पारिस्थितिकी (Ecosystem) की जीवनरेखा हैं। 27 अगस्त 2026 को दुनिया भर में द्वितीय विश्व झील दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त यह दिन हमें चेतावनी देता है कि यदि हमने इन प्राकृतिक जलाशयों को नहीं बचाया, तो वैश्विक जल सुरक्षा और जैव विविधता पूरी तरह धराशायी हो जाएगी।

27 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 12 दिसंबर 2024 को एक सर्वसम्मत प्रस्ताव (A/RES/79/142) पारित कर 27 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'विश्व झील दिवस' घोषित किया था। पहला आयोजन वर्ष 2025 में हुआ था।

शिगा सम्मेलन की याद: 27 अगस्त 1984 को जापान के शिगा प्रांत में पहला 'विश्व झील सम्मेलन' आयोजित किया गया था।

झील बिवा की प्रेरणा: शिगा में जापान की सबसे बड़ी मीठे पानी की 'बिवा झील' स्थित है, जिसने दुनिया का ध्यान झीलों के संरक्षण की ओर खींचा।

झीलों का पर्यावरणीय एवं आर्थिक महत्व

दुनिया भर में लगभग 11.7 करोड़ झीलें मौजूद हैं। यद्यपि पृथ्वी का अधिकांश मीठा पानी ग्लेशियरों और भूजल में संचित है, लेकिन सतह पर आसानी से उपलब्ध तरल मीठे पानी का 90% से अधिक हिस्सा झीलों में ही पाया जाता है।

भूमिकामानव एवं पर्यावरण के लिए योगदान
जल सुरक्षापेयजल, कृषि और दैनिक उपयोग के लिए सबसे बड़ा सतही स्रोत।
आजीविकामत्स्य पालन, स्थानीय व्यापार और पर्यटन से करोड़ों लोगों को रोजगार।
जलवायु नियंत्रणबाढ़ के असर को कम करना और सूखे के प्रभाव को संतुलित रखना।
जैव विविधतापक्षियों, मछलियों और दुर्लभ जलीय जीवों के लिए प्राकृतिक आवास।

 

अस्तित्व पर मंडराते चार बड़े खतरे

प्रदूषण का अनियंत्रित प्रवाह: रसायनिक उर्वरक, सीवेज, औद्योगिक कचरा और प्लास्टिक झीलों के पानी को जहरीला बना रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन: बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण जल वाष्पीकरण (Evaporation) की दर बढ़ी है। अनिश्चित मानसूनी चक्र से झीलों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है।

अत्यधिक दोहन: उद्योगों और अव्यवस्थित शहरीकरण के कारण झीलों से सीमा से अधिक पानी निकाला जा रहा है।

हरितगृह गैसों का उत्सर्जन: प्रदूषित झीलों में जमा कार्बनिक कचरा मीथेन जैसी हानिकारक गैसें छोड़ रहा है, जो ग्लोबल वार्मिंग को और बढ़ा रहा है।

चिंताजनक तथ्य: बीते 50 वर्षों में मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर लगभग 85% प्रजातियों की आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

समाधान और सामूहिक दायित्व

झीलों का संरक्षण केवल सरकारी नीतियों के भरोसे संभव नहीं है। इसके लिए नागरिक भागीदारी और कड़े कानूनी ढांचों का समावेश आवश्यक है:

नागरिक स्तर पर: प्लास्टिक कचरे का शून्य उपयोग, झीलों के पास अपशिष्ट न फेंकना और जल की बर्बादी रोकना।

प्रशासनिक स्तर पर: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को अनिवार्य बनाना, प्राकृतिक जल नालों (Drainage Channels) पर अतिक्रमण हटाना और झीलों की नियमित निगरानी।

विश्व झील दिवस 2026 हमें स्पष्ट संदेश देता है कि जब तक झीलें जीवित हैं, तब तक हमारी नदियां, जैव विविधता और मानव सभ्यता सुरक्षित हैं। झीलों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने का संकल्प है।

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