आधुनिक जीवनशैली, खान-पान और पर्यावरण के बीच क्या नई पीढ़ी का शरीर अपनी वास्तविक उम्र से पहले ही ढल रहा है? जानिए इस गंभीर चिकित्सा सवाल पर क्या कहते हैं वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के हालिया शोध...
कैंसर को लंबे समय से ढलती उम्र और बुजुर्गों से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, उसकी कोशिकाओं (cells) में धीरे-धीरे टूट-फूट और क्षति होती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता चला जाता है। लेकिन बीते कुछ दशकों में दुनिया भर के चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक चिंताजनक बदलाव देखा है—55 वर्ष या उससे कम उम्र के युवाओं में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
इस प्रवृत्ति ने वैज्ञानिकों को एक नए और बुनियादी सवाल पर विचार करने के लिए मजबूर किया है: क्या आधुनिक युग में पैदा हुई नई पीढ़ी का शरीर पिछली पीढ़ियों की तुलना में तेजी से बूढ़ा हो रहा है?
अमेरिका स्थित 'वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन' के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन ने इस आशंका को और बल दिया है।
इस विषय को गहराई से समझने के लिए 'उम्र' के दो अलग-अलग पहलुओं को जानना जरूरी है:
कालानुक्रमिक उम्र (Chronological Age): यह किसी व्यक्ति के जन्म की तारीख से गिनी जाने वाली सीधी-सादी वास्तविक उम्र है।
जैविक उम्र (Biological Age): यह दर्शाती है कि व्यक्ति का शरीर अंदरूनी रूप से कितना पुराना या स्वस्थ है। इसे मापने के लिए वैज्ञानिक रक्त में मौजूद रसायनों, प्रोटीन, मेटाबॉलिज्म तथा विभिन्न आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली और बदलावों का विश्लेषण करते हैं।
उदाहरण: 40 वर्ष की समान वास्तविक उम्र वाले दो व्यक्तियों के शरीर की आंतरिक स्थिति पूरी तरह भिन्न हो सकती है। सही दिनचर्या और पोषण वाले व्यक्ति का शरीर जैविक रूप से 32 वर्ष का हो सकता है, जबकि असंतुलित दिनचर्या वाले दूसरे व्यक्ति की जैविक उम्र 48 वर्ष तक पहुँचना संभव है।
वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन के 'यूके बायोबैंक' के 1.54 लाख से अधिक युवाओं और अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के 'ऑल ऑफ अस' कार्यक्रम के 10,000 से अधिक प्रतिभागियों के डेटा का गहन विश्लेषण किया।
विभिन्न युगों में जन्मे लोगों की जैविक उम्र की तुलना करने पर चौंकाने वाले परिणाम सामने आए:
ब्रिटेन का डेटा: 1965 से 1974 के बीच जन्मे लोगों में 1950 से 1954 के बीच जन्मे लोगों की तुलना में तेजी से उम्र बढ़ने (Biological Aging) के संकेत अधिक पाए गए।
अमेरिका का डेटा: यहाँ यह अंतर और भी चिंताजनक था। 1990 से 1999 के बीच जन्मे युवाओं में जैविक उम्र बढ़ने का स्तर 1965 से 1969 के बीच जन्मे लोगों की तुलना में काफी अधिक रिकॉर्ड किया गया।
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े व्यापक जनसमूह के औसत अंतर को दर्शाते हैं, जिसका मतलब यह नहीं है कि हर युवा व्यक्ति तेजी से बूढ़ा हो रहा है।
अध्ययन में आगे यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या तेजी से बढ़ती जैविक उम्र और कम उम्र में कैंसर (Early-Onset Cancer) के बीच कोई सीधा संबंध है।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:
जिन व्यक्तियों में जैविक उम्र तेजी से बढ़ने के संकेत मिले, उनमें कम उम्र में ठोस ट्यूमर/कैंसर (Solid Cancers) होने का खतरा लगभग 8 प्रतिशत अधिक पाया गया।
सर्वाधिक जैविक उम्र वाले समूह में यह खतरा सबसे कम biological aging वाले समूह की तुलना में 15 प्रतिशत तक अधिक देखा गया।
शरीर के अलग-अलग तंत्रों की जैविक उम्र का अध्ययन करने पर कुछ विशेष संबंध भी सामने आए:
| जैविक अंग / तंत्र की स्थिति | बढ़ता कैंसर का खतरा |
|---|---|
| कमजोर / बूढ़ी होती प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) | कम उम्र में फेफड़ों के कैंसर का अधिक जोखिम |
| वसा ऊतक (Adipose Tissue / बॉडी फैट) का जल्दी बूढ़ा होना | कम उम्र में आंत (Gastrointestinal) के कैंसर का खतरा |
वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल एक कारण से युवाओं में बढ़ते कैंसर के मामलों को नहीं समझाया जा सकता। हालाँकि, कई कारक शरीर के मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डाल रहे हैं:
मोटापा और असंतुलित खान-पान
अति-प्रसंस्कृत भोजन (Ultra-processed foods) का अधिक सेवन
शारीरिक निष्क्रियता और सिडेंटरी लाइफस्टाइल
शराब, धूम्रपान और अत्यधिक मानसिक तनाव
पर्यावरणीय प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक का जोखिम
शोधकर्ता अब इस बात की विस्तृत जाँच कर रहे हैं कि आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय बदलाव हमारे डीएनए तथा कोशिकाओं की मरम्मत करने की क्षमता को लंबी अवधि में किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं।
इस अध्ययन के व्यावहारिक लाभ भविष्य में चिकित्सा जगत की रणनीतियों को बदल सकते हैं:
शुरुआती पहचान (Early Detection): जैविक उम्र के मापदंडों के आधार पर उन युवाओं की पहचान पहले ही की जा सकेगी, जिनमें कैंसर का जोखिम अधिक है।
समय पर स्क्रीनिंग: ऐसे उच्च-जोखिम वाले व्यक्तियों में कम उम्र से ही कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू किए जा सकेंगे।
निवारक नीतियाँ: जीवनशैली में सुधार के जरिए कोशिकाओं के बूढ़े होने की गति को धीमा करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।
यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि तेजी से जैविक उम्र का बढ़ना ही सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है—वर्तमान में दोनों के बीच एक मजबूत सह-संबंध (correlation) पाया गया है, जिसकी पुष्टि के लिए और अधिक गहन अध्ययनों की आवश्यकता है।
फिर भी, यह शोध हमारे सामने एक मौलिक प्रश्न खड़ा करता है: क्या आधुनिक जीवनशैली हमारी कोशिकाओं को उनकी प्राकृतिक क्षमता से पहले थका रही है? इस सवाल का जवाब न केवल युवाओं में बढ़ते कैंसर को समझने के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और दीर्घायु जीवन देने की दिशा में भी बेहद निर्णायक साबित होगा।